Tuesday, 7 June 2016

अंधे प्रेम का नंगा सच


"बाबू जी, कल से भूखा हूँ, कुछ पैसे दे दो" अमित ने जैसे हि अपने कार कि खिड़की नीचे खिसकायी, एक छोटा सा धूल-धूसरित हाथ... चेहरे के सामने गया !

नज़र दौड़ाई, बाहर एक 10-11 वर्ष का लड़का खड़ा था ! फटे-पुराने मैले कपड़े, गंदा शरीर, बिखरे बाल उसकी फटेहाल जिंदगी को बयाँ कर रहे थे!
"क्या हैं?" अमित कि आवाज़ में थोड़ी कड़ाई थी !
"साहब, कल से कुछ खाने को नही मिला, कुछ पैसे दे दो......." बचपन कि गंदी काया अर्चना कर रही थी !
"मै सब समझता हूँ.....तुमलोग कहानियाँ सुना के लोगों से पैसे ऐंठते हों.....और तम्बाकू शराब पीते हों" अमित ने इस उम्मीद में डांट लगाई कि, शायद सच सुन के भाग जायेगा !
"साहब, मैं नही पिता हूँ.....वो...वो....मेरा बाप पिता हैं.....मुझे कुछ खाने को नही देता "
"तुम्हारी माँ क्या करती हैं? " अमित नरम हुआ !
"साहब,...मेरी माँ नही हैं....बापू बोलता हैं....उसे मैं गंदी नालियों में मिला था" उसकी मासूमियत भरी आँखो में आँसू गये !
अचानक हि अमित को झटका लगा ! उसे अपने अतीत कि कुछ बदनुमा यादें सताने लगी ! कई प्रश्न उसके अंतर्मन को झकझोरने लगे !
 कहीँ......सुप्रिया ने भी..................नही..नही............ऐसा नही हो सकता !
"अरे, पापा....जल्दी घर चलो.....मम्मा के साथ फिल्म देखने जानी हैं...देर हो गयी तो...मम्मा रूठ जायेगी !" पीछे बैठी बेटी कि आवाज़ ने...अमित को जैसे किसी ख्वाब से जगाया !
अमित ने खुद को थोड़ा सहज करते हुये,...पैंट कि जेब से एक पचास का नोट निकाला...और देने को हाथ आगे बढा़ई.....लेकिन... ये क्या..... वह तो जा चुका था !
अमित ने तुरंत खिड़की के बाहर एक सरसरी निगाह दौड़ाई !.... दुर...वह लड़का जाता हुआ दिखा ! एक नशेड़ी सा आदमी....उसके हाथ पकड़ रखे था ! उसके एक हाथ में.... डंडा था,...! बच्चे के रोने कि आवाजें यहाँ तक रही था !
रोने कि आवाजों पर पिछे से गाडियों का शोर बढ़ने लगा था ! बेटी भी कई बार टोक चुकी थी....अमित ने गाड़ी आगे बढा दी....लेकिन आज कि घटना से उसका अंतर्मन हिल चुका था ! वह बड़ी मुश्किल से गाड़ी को ड्राइव कर पा रहा था !

1 comment:

हाँ, मैं भ्रष्ट हूँ !

                                                                           :-K.KUMAR ABHISHEK (11/02/2016) एक भारतीय होने के नाते, भार...